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राशि ज़िंदगी में कामयाबी पाने के बाद अपने माँ बाप के साथ उसके ख़राब सम्बन्धों के बारे में अपनी दोस्त को बताती है।

राशिः मैं एक ऐसे परिवार से आती हूँ जिसे मुझ पर कभी भरोसा ही नहीं था। वो अपनी छोटी जगह की छोटी सोच से कभी ऊपर ही नहीं उठ पाए और मुझे बहुत छोटे से ही समझ आ गया था कि मुझे अपने लिए एक नया रास्ता खुद ही बनाना पड़ेगा। ज़रूरी नहीं है कि अगर आप ग़रीब घर में पैदा हुए हो तो सारी ज़िंदगी ग़रीबी में ही निकाल दो। एक बाहर निकलने का रास्ता हमेशा होता है, बस आपको वो ढूँढना पड़ता है। मैं अपने माँ बाप को नीचा नहीं दिखाना चाहती लेकिन सच तो यही है की हम इतने ग़रीब थे कि खाना भी ठीक से नसीब नहीं था। shopping का तो नाम तक नहीं सुना था। शुरू के 10-12 साल तक तो मैं लड़कों जैसी लगती थी क्योंकि मेरे कपड़े हमेशा मेरे भाई के छोटे हो गए कपड़े होते थे। मेरे घरवालों ने कभी कोशिश ही नहीं की कुछ बड़ा करने की, उस ग़रीबी से बाहर निकलने की। मेरे पापा एक factory में काम करते थे और माँ सिलाई बुनाई का अगर कुछ मिल जाए तो। हमेशा एक ही goal था कि पढ़ाई करो और नौकरी ढूँढ लो। ये business वग़ैरह के तो बारे में सोचना भी पाप था।

आज मैं successful हूँ, अच्छा ख़ासा कमाती हूँ लेकिन ख़ुश नहीं हूँ। चाहूँ तो अपने माँ बाप के लिए जो चाहूँ कर सकती हूँ, लेकिन फिर भी अंदर से हमेशा लगता है कि इतनी success के बाद भी वो मेरी इज़्ज़त नहीं करते, मेरे लिए ख़ुश नहीं है और बड़ी तकलीफ़ होती है इस बात की। बस इतना चाहती हूँ कि वो मुझे आ कर एक बार कह दें की बेटा हमें गर्व है तुझ पर… बस एक बार उनके मुँह से ये सुनना चाहती हूँ।