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नीरज अपने दोस्त को बताता है कि किस तरह एक छोटे से बच्चे से उसने अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा सबक़ सीखा।

नीरजः एक दिन मैं बस अपने नाश्ते के लिए बैठा ही था.. एक हाथ में newspaper दूसरे में coffee and feeling great। तभी मुझे सामने से एक family आती हुई दिखी, a mother, a father, एक young सा लड़का और सब बड़े ख़ुश लग रहे थे। वो लोग बिल्कुल मेरे सामने एक टेबल पर बैठे। और कुछ ही minute बाद एक छोटा सा लड़का अंदर आया। उस लड़के में सबसे ख़ास बात पता है क्या थी? उसके हाथों में crutches थे। वो होते हैं ना… जो हाथों से attach हो जाते हैं ताकि तुम अपना balance ना loose करो और चल सको। वो बच्चा मुश्किल से दस साल का होगा। और जब वो चल कर अपनी family के पास आ रहा था तो मैंने देखा कि उसकी एक आँख भी थोड़ी ख़राब थी।

लेकिन सबसे ज़्यादा हैरानी मुझे उस बच्चे की हिम्मत देख कर हुई। उसकी चाल में वो confidence वो authority और… ( गला साफ़ करते हुए)

मैंने अपनी ज़िंदगी में इससे ज़्यादा ख़ूबसूरत चीज़ कभी नहीं देखी थी। और ये और कुछ नहीं इंसानी जज़्बे की ताक़त थी, ठीक मेरी आँखों के सामने। एक बच्चे के through मुझे ये सिखाती हुई कि जीना क्या है। मैंने देखा उसको जब वो अपनी family के साथ बैठा और उस वक़्त मैंने उस family को और भी गौर से देखा। उसकी माँ के चेहरे पर दर्द साफ़ नज़र आ रहा था, बाप के चेहरे पर एक उदासी थी, उसका भाई थोड़ा embarrassed लग रहा था। और इस सबके बावजूद उनमें एक दूसरे के लिए इतना प्यार था जो बहुत special था।

और मैं खुद को रोक नहीं पाया। कितनी बार ऐसा होता है जब मैं शिकायत करता हूँ, नाराज़ होता हूँ मेरी life में जो कुछ हो रहा है उसको ले कर और यहाँ पर एक छोटा सा बच्चा था जिसके सामने में छोटा लग रहा था। मैं वहीं रोने लगा। जितना धीरे हो सकता था उतना धीरे। public place में था ना। मैंने newspaper से अपना चेहरा छिपा लिया और खुद को सम्भालने के लिए bathroom चला गया।

और अब जब भी मुझे अपनी life मुश्किल लगती है मैं बस उस बच्चे को याद कर लेता हूँ जिससे मैंने ख़ुश रहना सीखा। हम सब को उससे सीखना चाहिए।