नफ़रत है मुझे इस शहर से। भाग जाना चाहती हूँ मैं यहाँ से! मेरे लायक़ नहीं है यह शहर। इस जगह के लिए बहुत modern हूँ मैं। मैं किसी बड़े काम के लिये पैदा हुई थी…
मैंने नहीं चाहा था की मैं ऐसा हूँ। बहुत कोशिश की मैंने अपने आप से भागने की। और अपनी सारी उम्र भागा हूँ। हर दिन इस ख़ौफ़ में रहता हूँ कि मैं एक झूठी ज़िंदगी जी रहा हूँ…
यार मुझे समझ नहीं आता। मैंने उनको अपनी किताब पढ़ने के लिए दी जब तक वो बाहर बैठी मेरा clinic से बाहर आने का इन्तज़ार कर रही थीं। मुझे लगा कि चलो वो बोर नहीं होंगी और उन्हें अच्छा भी लगेगा
जब मैं छोटा था ना, शायद 7-8 साल का, मैं स्कूल में बीमार पड़ गया। मेरे सिर में बहुत तेज दर्द था, उल्टी भी हुई। तो मैं स्कूल की Nurse के ऑफ़िस में चला गया। मुझे बुख़ार भी हो गया था तो मेरे पापा मुझे pick करने आये…


