तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई दीपक अख़बार में मेरे बारे में ये बकवास लिखने की? पिछले दस साल से जानता हूँ मैं तुम्हें और तुमने बिना सोचे समझे, बिना कोई…
हमेशा मुझे क्यों blame करने लगती है तू दिव्या? पागल है क्या तू? अगर वो लड़के मेरे पीछे लगे हुए हैं तो ये मेरी गलती है क्या? साला मैं तो उनके क़रीब भी नहीं…
तुझे पता है ना मेरे घर के हालात? खाने तक के पैसे नहीं हैं हमारे पास। माँ का इलाज कैसे कराऊँ? पैसे कहाँ से आएँगे इलाज के? तू देगा? कौन देगा? बता…
तुमसे एक बात पूछ सकती हूँ? नहीं सच बताओ… पूछूँ या नहीं? देखो, मैं तुमसे बहस नहीं करना चाहती। ना मैं लड़ाई करना चाहती हूँ.. मुझे तुम बस इतना बताओ…
आप में कभी हिम्मत थी ही नहीं। आपने ने business को कभी उसूलों और आदर्शों पर चलाया ही नहीं, बस हमेशा profit profit profit। पैसे के सिवा किसी और चीज़ की चिंता करी कभी आपने…
मुझे ये बात कुछ समझ नहीं आ रही। हमेशा ऐसा क्यों होता है कि जब भी मैं अपनी life की किसी अच्छी चीज़ के बारे में या जो चीज़ मुझे ख़ुशी…
तो तू मेरे वहाँ के experience के बारे में जानना चाहता है? जो time मैंने वहाँ बिताया है वो मेरी ज़िंदगी का सबसे डरावना time था। हर रोज़ कहीं बम फटते थे, किसी भी वक्त कहीं से भी अचानक…
देखो अरमान, अब मैं और बर्दाश्त नहीं कर सकती। अपनी सारी ज़िंदगी जैसा तुमने चाहा मैंने वैसा किया। मैं बच्चा नहीं चाहती थी तुम्हारे लिए वो किया…
अभी तक एक celebrity होता तू, लेकिन तेरे नख़रे इतने हैं। हर role को तू मना कर देता है, हर role को! मैं भी समझता हूँ यार कि…
जिस तरह की मेरी ज़िंदगी है उसका तुझे अंदाज़ा भी नहीं है। तुम लोगों को लगता है की मेरी life कितनी अच्छी है, मेरे dad एक बहुत बड़े producer हैं और जो कुछ भी मैं चाह सकती हूँ वो आराम से मिल सकता…


